रविवार, 29 मई 2016

Vidya Balan launches Ekk Albela’s song ‘Shola Jo Bhadke’

After launching the fascinating trailer of the Marathi movie, Ekk Albela recently, the makers of the Bhagwan Dada biopic including producers Manglmurti Films, Kimaya Motion Pictures, Dr Monish Babre and director Shekhar Sartandel launched the movie’s iconic song 'Shola Jo Bhadke' at a plush five-star hotel in Mumbai. Ekk Albela is the untold story of India’s first dancing and action hero Bhagwan Dada and his extraordinary journey as he went out to become one of the biggest legends of Hindi cinema. Produced by Kimaya Motion Pictures and directed by Shekhar Sartandel, Manglmurti Films’ Ekk Albela features award winning versatile actor Mangesh Desai as Bhagwan Dada and the powerhouse performer Vidya Balan portraying the role of renowned yesteryear actress Geeta Bali in her
debut Marathi movie. The popular song ‘Shola Jo Bhadke’ featured in the Bhagwan Dada-Geeta Bali starrer Albela (1951) has been recreated in Ekk Albela which was launched amidst a packed house by Vidya Balan, Mangesh Desai, director Shekhar Sartandel, producers Sangeeta Ahir, Krrish Ahir and producer Dr Monish Babre. Interestingly, Vidya not only surprised the gathered media in Geeta Bali’s look but also performed on the iconic song along with her co-star Mangesh Desai. The biopic that explores the era between 1930 to 1951 has several dialogues in Hindi and two Hindi songs from the original film Albela including Shola Jo Bhadke and Bholi Surat Dil Ke Khote. Ekk Albela is directed by Shekhar Sartandel and produced by Monish Babre, It is a Kimaya Motion Pictures Production and presented by Manglmurti Films and releases on 24 th  June, 2016

एक डॉक्टर की मौत को जीवंत करने वाले पंकज कपूर

सालों की मेहनत  और पारिवारिक ज़िन्दगी को दांव पर लगा कर  डॉक्टर दीपंकर रॉय लेप्रोसी की वैक्सीन खोज लेते हैं।  यह खबर आग की तरह चैनलों के माध्यम से फ़ैल जाती हैं।  एक अंजाना सा जूनियर डॉक्टर वर्ल्ड फेम हो जाता है।  इसके साथ ही डॉक्टर रॉय को प्रताड़ित करने का सिलसिला शुरू हो जाता है।  उससे स्पष्टीकरण पूछा जाता है कि  लेप्रोसी वैक्सीन की खबर मीडिया में लीक कैसे हो गई।  उसे प्रशासन से लेकर शासन के उच्च स्तर से फटकार  मिलती है।  साथ के डॉक्टर उसे अपमानित करने की कोशिश करते हैं।  उसे दिल का दौरा पड़ता है। डॉक्टर का एक दूरस्थ गाँव में तबादला कर दिया जाता है। ऐसे समय में उसका साथ उसकी पत्नी और दो दोस्त ही देते हैं।  तभी खबर आती है कि लेप्रोसी वैक्सीन की खोज अमेरिकी  वैज्ञानिकों ने कर ली है। इसके साथ ही एक डॉक्टर की मौत हो जाती है।  यह कहानी है बांगला फिल्म डायरेक्टर तपन सिन्हा की १९९० में रिलीज़ फिल्म एक डॉक्टर की मौत की। यह फिल्म रामपद चौधरी की कहानी अभिमन्यु पर रामपद और तपन सिन्हा द्वारा लिखी गई थी।   यह फिल्म नौकरशाही की तिकड़मों,  सिस्टम द्वारा प्रतिभा को प्रताड़ित करने और मान्यता न देने की है।  लेकिन, डॉक्टर की मौत तब भी नहीं होती।  फिल्म एक डॉक्टर की मौत मानवता की जीवंतता की कहानी है।  फिल्म के ख़त्म होते होते डॉक्टर रॉय को जॉन एंडरसन फाउंडेशन का एक खत मिलता है, जिसमे उसे दूसरे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के साथ अन्य दूसरी बीमारियों की दवाएं खोजने का न्योता मिलता है। डॉक्टर रॉय अनुभव करते हैं कि उनकी मेहनत बेकार नहीं गई थी।  वह इस न्योते को स्वीकार करने का मन बनाते हैं, क्योंकि वह मानव कल्याण के लिए काम करते रहना चाहते हैं।  इस फिल्म में डॉक्टर रॉय की बीवी का किरदार शबाना आज़मी ने किया था।  साथी डॉक्टर  कुंडू का किरदार बांगला फिल्म अभिनेता अनिल चटर्जी कर रहे थे।  आज के विश्व प्रसिद्ध बॉलीवुड एक्टर इरफ़ान खान ने डॉक्टर रॉय के दूसरे दोस्त का किरदार किया था। यह इरफ़ान के करियर की तीसरी फिल्म थी। फिल्म में डॉक्टर दीपंकर रॉय का किरदार अभिनेता पंकज कपूर ने किया था।  पंकज कपूर का आज जन्मदिन (२९ मई १९६४) है।

अंधे और लंगड़े लड़कों की 'दोस्ती'

६ नवंबर १९६४ को राजश्री प्रोडक्शन्स से एक फिल्म दोस्ती रिलीज़ हुई थी।  सत्येन बोस निर्देशित यह फिल्म एक बांगला फिल्म 'ललू-भुलु' का हिंदी रीमेक थी।  इस फिल्म से दो नए चहरे सुधीर कुमार और सुशील कुमार का हिंदी दर्शकों से परिचय हुआ था।  सुधीर कुमार ने अंधे लडके मोहन की भूमिका की  थी, जो सडकों पर गीत गा कर अपने लंगड़े दोस्त रामू को पढ़ाना चाहता है।  रामू की भूमिका सुशील कुमार ने की थी।  दोस्ती अभिनेता संजय खान की डेब्यू फिल्म थी।  फिल्म में मोहन की नर्स बहन और संजय खान की प्रेमिका की भूमिका करने वाली मराठी एक्ट्रेस उमा राव की भी यह पहली फिल्म थी।  बेबी फरीदा ने एक बीमार बच्ची और रामू और मोहन की दोस्त का किरदार किया था।  बेबी फरीदा अब बड़ी हो कर दादी बन गई हैं।  उन्हें टीवी और फिल्मों में आज भी देखा जा सकता है।  लेकिन, सबसे ज़्यादा दिलचस्प है दोनों अंधे और लंगड़े लड़कों का किरदार करने वाले लड़कों के बारे में।  जब फिल्म रिलीज़ हुई और बड़ी हिट साबित हुई तो उस समय यह अफवाह उडी की इन दोनों का किसी बड़े एक्टर ने खुन्नस में मर्डर करवा  दिया, क्योंकि यह उससे ज़्यादा लोकप्रिय हो गए थे।  यह भी अफवाह थी कि यह सड़क दुर्घटना में मारे गए।  लेकिन, यह सब अफवाहे थी।  अलबत्ता इन दोनों का करियर लंबा नहीं चल सका।  सुशील कुमार को फिल्मों से मोह-भंग हो गया था।   क्योंकि, फिल्म निर्माता इन दोनों का स्क्रीन टेस्ट लेते।  पर फाइनल कभी नहीं कर पाते। राजश्री के ताराचंद बड़जात्या इन दोनों को लेकर अगली फिल्म बनाना चाहते थे।  इन माहवार तनख्वाह भी दी जा रही थी।  लेकिन, तभी सुधीर कुमार को एवीएम की फिल्म लाडला का ऑफर मिला।  सुधीर ने इस फिल्म को राजश्री प्रोडक्शन के साथ कॉन्ट्रैक्ट के बावजूद स्वीकार कर लिया।  इसके लिए सुधीर को हर्जाना भी देना पड़ा।  इससे नाराज़ हो कर ताराचंद बड़जात्या ने वह प्रोजेक्ट ही ख़त्म कर दिया।   हालाँकि, सुधीर कुमार ने बाद में संत  ज्ञानेश्वर,  लाडला, जीने की राह, आदि फ़िल्में की।  लेकिन, तब तक सुशील कुमार का फिल्मों से मोह भंग हो गया।  उन्होंने एयरलाइन्स ज्वाइन कर ली।  दुखद घटना हुई सुधीर कुमार के साथ।  हुआ यह कि १९९३ के बॉम्बे बम ब्लास्ट के बाद बॉम्बे में कर्फ्यू लगा हुआ था।  सुधीर कुमार मुर्गा खा रहे थे कि एक हड्डी उनके गले में फंस गई।  उनका गला बुरी तरह से घायल हो गया।  कर्फ्यू लगा होने के कारण उन्हें इलाज भी नहीं मिल पाया।  कुछ दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई।  सुशील कुमार ज़रूर स्वस्थ एवं सानन्द अपनी रिटायरमेंट की ज़िंदगी जी रहे हैं।  

शनिवार, 28 मई 2016

नर्गिस को मदर इंडिया बनाने वाले महबूब खान


महबूब खान के बैनर महबूब प्रोडक्शन्स का हंसिया और हथौड़ा इस बात का गवाह था कि वह सोशलिस्ट विचारधारा के थे।  ऐसा स्वाभाविक भी था।  गुजरात के गाँव बिल्मोरा के रमज़ान खान ने बॉलीवुड का महबूब खान बनने के सफर में फिल्म निर्माता और घोडा सप्लायर के अस्तबल में घोड़ों की नाल ठीक करने का काम करने से लेकर फिल्म अलीबाबा चालीस चोर के चालीस चोरो  में से एक चोर की भूमिका की।  उनकी फिल्मों में गरीबी, संघर्ष, शोषण, ज़मींदार, आदि ताकतवर और कमज़ोर चरित्रों का पॉजिटिव चित्रण मिलता है। मेरी जान, दिलावर और ज़रीना जैसी फिल्मों में अभिनय के बाद महबूब खान ने फिल्म अल हिलाल उर्फ़ जजमेंट ऑफ़ अल्लाह (१९३५) से बतौर निर्देशक कदम रखा।  महबूब खान ,नमाज़ी आदमी थे।  लेकिन, उनकी फिल्मों में कभी भी धार्मिक तनाव या थोथे उपदेश नज़र नहीं आये।  उनकी फ़िल्में या तो ठेठ सामाजिक होती थी या फिर रोमांस से भीगी।  उन्होंने जागीरदार, वतन और एक ही रास्ता जैसी लीक से अलग सफल फ़िल्में बनाई।  लेकिन, उन्हें ख़ास सराहना मिली पर्ल एस बक के उपन्यास मदर पर आधारित फिल्म औरत से।  इस फिल्म में उन्होंने एक सूदखोर साहुकार के अत्याचारों से तंग आकर गाँव छोड़ कर चले गए किसान की अकेली औरत के संघर्ष को दिखाया था।  इस फिल्म को सराहना के साथ साथ बड़ी सफलता भी मिली।  लेकिन, महबूब को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति मिली औरत के रीमेक मदर इंडिया (१९५७) से।  इस फिल्म को ऑस्कर  पुरस्कारों में नामांकन मिला।  महबूब को श्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।  उन्होंने म्यूजिकल मनमोहन और जागीरदार बनाई तो ज़मींदार के अत्याचार पर रोटी भी बनाई।  दो  पुरुषों के एक स्त्री से प्रेम की कहानी अंदाज़ समय से काफी पहले की फिल्म थी। इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा को त्रिकोण फ़िल्में बनाने का फार्मूला दिया। हलके फुल्के रोमांस वाली फिल्म अनमोल घड़ी बड़ी हिट फिल्म साबित हुई।  दिलीप  कुमार, नादिरा और निम्मी अभिनीत फिल्म आन देश की पहली टैक्नीकलर फिल्म थी।  महबूब खान एक साफ़ दिल आदमी थे।  राजकपूर के साथ रोमांस के कारण नर्गिस फिल्म आन को बीच रास्ते छोड़ कर चली गई थी, लेकिन, इसके बावजूद महबूब खान ने मदर इंडिया की राधा  नर्गिस को ही बनाया।  उन्होंने ऐतराज़ करने पर दिलीप कुमार को हटा कर सुनील दत्त को बिरजू बना दिया।  लेकिन, दिलीप कुमार का दबाव सहन नहीं किया। यहाँ उल्लेखनीय है कि नर्गिस को तक़दीर फिल्म से नायिका बनाने वाले महबूब खान ही थे। उन्होंने ही फातिमा को नर्गिस नाम दिया था। कैसी विडम्बना है कि लगातार हिट फिल्म देने वाले महबूब खान की आखिरी फिल्म सन ऑफ़ इंडिया (१९६२) फ्लॉप हो गई । इस फिल्म की रिलीज़ के दो साल के अंदर महबूब खान का भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के एक दिन बाद २८ मई १९५७ को  निधन हो गया।  उनकी सौंवी जन्मतिथि पर भारत सरकार के डाक विभाग ने डाक टिकट जारी किया था।  

Global Indian Music Academy Brings In A Special Treat For All Music-Lovers With ‘GiMA 101 Lessons’

The Global Indian Music Academy is all set to kick-start their exciting new digital initiative- ‘GiMA 101 Lessons’, which will feature leading Indian musicians such as Hariharan, Arijit Singh, Monali Thakur, Kanika Kapoor, Neha Kakkar, amongst many others who will be providing nuggets of wisdom to their fans, music enthusiasts and aspiring musicians all over the world to hone their skills! The initiative seeks to be a way to teach aspiring young artists to grow their talent from the personal experiences shared by these talented musical stalwarts.
Launched at the 6th GIONEE COLORS GiMA AWARDS stage by Indian playback and ghazal singer Hariharan, this concept will showcase highly acclaimed artistes and musicians sharing their knowledge on how to better their skills with valuable tips and tricks as well as practice techniques which are of utmost importance to make it big in the music industry. With the first webisode all set to be released on 4th June, this series will be the beginning of an awe-inspiring journey through the life and lessons gained by some of the most renowned musicians in the industry.
Commenting on this remarkable initiative, Mr. Sabbas Joseph, Director, Wizcraft International said, “Every year with GiMA, we consistently recognize the hard work and achievements of the finest Indian musicians and honor the best musicians of our country. Being surrounded by such talent is truly a blessing and thus the genesis of ‘GiMA 101 Lessons’ was designed as a way to bring together the Indian music fraternity closer to its fans. The series of webisodes is a great platform to reach out to all the music enthusiasts in a fun interactive manner and at the same time inspire budding musicians to follow their dreams.”
Similarly, introducing this new facet, Indian singer Hariharan said, "The idea behind GiMA 101 Lessons is to teach aspiring musicians and fans about various aspects of music. Through this initiative, each of us from the music community will engage with those who are keen to nurture their skills for a career in music. This is surely going to be a great platform to encourage the next-gen musicians to not give up on their dreams and we all are very excited about sharing our first-hand experience with everyone.” (need approval on this)

So, make sure you log on to the GiMA YouTube channel ((https://www.youtube.com/user/GIMA)) and watch our leading musicians don the teachers’ and tutoring the young talent in the country and all over the world.

KableOne & Saga Studios Present Lakadbaggey

After much anticipation, Lakadbaggey — a KableOne Original in association with Saga Studios — has finally premiered, and it’s already creati...