नहीं रहे विनोद खन्ना

यह ७ फरवरी १९६९ का शुक्रवार था।  निर्माता सुनील दत्त की ए सुब्बा राव निर्देशित फिल्म मन का मीत रिलीज़ हो रही थी।  सुनील दत्त ने मन का मीत अपने भाई सोम दत्त को नायक बनाने के लिए बनाई थी।  इस फिल्म से चार नए चेहरे- सोम दत्त के अलावा लीना चंद्रावरकर, संध्या और विनोद खन्ना का फिल्म डेब्यू हो रहा था।  सिनेमाघरों के बाहर दर्शकों की भीड़ जुटी थी तो इसलिए कि फिल्म के पोस्टरों में लीना चंद्रावरकर की उघड़ी छाती वाले पोस्टर आँखों को सुख दे रहे थे और वह इस अभिनेत्री का मीट यानि जिस्म देखना चाहते थे । इस एक्शन फिल्म में भी वास्तव में ऐसा ही कुछ था।  लीना चंद्रावरकर उदार अंग प्रदर्शन कर रही थी।  मगर, फिल्म जिस सोम दत्त के लिए बनी थी, वह बिलकुल फीके थे।  लीना के साथ उनकी जोड़ी मिसमैच हो रही थी।  संध्या भी फीकी थी।  बाद में, लीना चंद्रावरकर के उदार अंग प्रदर्शन के कारण फिल्म समीक्षकों के द्वारा यह फिल्म मैन का मीट घोषित की गई।  फिल्म में अपने अभिनय और व्यक्तित्व से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया फिल्म के विलेन प्राण की भूमिका करने वाले अभिनेता विनोद खन्ना ने ।  चॉकलेटी चेहरे और गड्ढे वाली ठोड़ी वाले बुलंद आवाज़ विनोद खन्ना में दर्शकों को हीरो मैटेरियल मिला।  अविभाजित भारत के पेशावर प्रान्त में ६ अक्टूबर १९४६ को जन्मे विनोद खन्ना के माता पिता विभाजन के बाद भारत आ गए।  विनोद खन्ना ने दिल्ली और बॉम्बे के बढ़िया स्कूलों में पढ़ाई की।  देवलाली नाशिक के बर्न्स स्कूल में पढ़ाई के दौरान विनोद खन्ना ने मुग़ल-ए- आज़म और सोलवा साल देखी और फिल्मों के दीवाने बन गए। सिडेन्हम कॉलेज मुंबई में कॉमर्स से ग्रेजुएट बने।  मन का मीत के दर्शकों को विनोद खन्ना में हीरो मटेरियल मिला। मगर  विनोद खन्ना को फिल्मकारों में बतौर रोमांटिक हीरो अपना विश्वास ज़माने में छह फिल्मों में सह भूमिकाएं करने पड़ी।  क्योंकि, उनकी पहली बतौर हीरो फिल्म नतीजा बुरी तरह से असफल हुई थी ।  इस फिल्म में विनोद खन्ना की नायिका बिंदु थी, जो बाद में बड़ी वैम्प बनी। विनोद खन्ना को बतौर रोमांटिक नायक  स्थापित किया निर्देशक शिव कुमार की फिल्म हम तुम और वह (१९७१) ने। इस फिल्म में विनोद खन्ना की नायिका भारती थी।  दक्षिण की स्टार भारती ने विनोद खन्ना के साथ पूरब और पश्चिम भी की थी। इस दौरान विनोद खन्ना ने सच्चा झूठा, मस्ताना, आन मिलो सजना, पूरब और पश्चिम, जाने अनजाने, ऐलान, रेशमा और शेरा, प्रीतम, रखवाला, हंगामा, मेरे अपने, मेरा गांव मेरा देश और मेम साब जैसी फिल्में में सह भूमिकाएं की।  इनमे ज़्यादातर अच्छे व्यक्ति वाली भूमिकाएं थी।  हम तुम और वह के बाद विनोद खन्ना का सितारा बुलंद हो गया।  एक समय वह उस समय के सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के लिए इकलौती चुनौती थे।  उस समय, जबकि वह बॉलीवुड के सबसे टॉप के अभिनेता साबित हो रहे थे, विनोद खन्ना ने ओशो आश्रम जाने के लिए फिल्मों से संन्यास ले लिया।  पांच साल बाद उनकी वापसी हुई।  उन्होंने मल्टी स्टार कास्ट फिल्म ज़मीन (संजय दत्त,  रजनीकांत, माधुरी दीक्षित और श्रीदेवी के साथ) से सफल वापसी की।  इन्साफ और सत्यमेव जयते से उन्होंने खुद को सोलो हीरो साबित किया।  मगर उन्हें सितारा बहुल और एक्शन फ़िल्में ही ज़्यादा मिली।  उन्होंने १९९७ में अपने बेटे अक्षय खन्ना को हीरो बनाने के लिए फिल्म हिमालयपुत्र का निर्माण किया।  विनोद खन्ना ने लगभग १३७ फ़िल्में की,  जिनमे ५४ सोलो हीरो थी।  हीरो राजेश खन्ना वाली उनकी सच्चा झूठा, आन मिलो सजना, प्रेम कहानी, कुदरत और राजपूत सुपरहिट हुई।  उनकी अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म परवरिश, ज़मीर, हेरा फेरी, खून पसीना, अमर अकबर अन्थोनी और मुकद्दर का सिकंदर सुपर हिट फ़िल्में थी।  उनकी मेरे अपने, गद्दार, अचानक, आरोप, कच्चे धागे, फरेबी, इम्तिहान, क़ैद, इंकार, इन्साफ, जुर्म, क्रांति, शक, मीरा, रिहाई, ९९, पहचान: द फेस ऑफ़ ट्रुथ, रेड अलर्ट : द वॉर वीथिन को दर्शकों के साथ साथ फिल्म समीक्षकों   ने भी सराहा। विनोद खन्ना ने तीन पीढ़ी की अभिनेत्रियों सायरा बानो, मुमताज़, योगिता बाली, रेखा हेमा मालिनी, शबाना आज़मी, नीतू सिंह, मीनाक्षी शेषाद्रि, पूनम ढिल्लों, करिश्मा कपूर और अमीषा पटेल के साथ अभिनय किया।  २०१५ में रिलीज़ शाहरुख़ खान के साथ फिल्म दिलवाले में वह चरित्र भूमिका में थे।  दबंग में सलमान खान और अरबाज़ खान के पिता की भूमिका में उन्हें काफी पसंद किया गया।  विनोद खन्ना ने दो शादिया की।  पहली पत्नी गीतांजलि से उन्हें अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना तथा दूसरी पत्नी कविता से एक बेटा साक्षी और बेटी श्रद्धा का जन्म हुआ। वह दुनिया की बढियाँ कारों के शौक़ीन थे।  उनके गेराज में बीएमडब्ल्यू, मर्सेडीज़, पॉर्श और कैडिलक गाड़ियां खडी रहती थी।  १९९७ में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए गुरदासपुर से सांसद बने।  २००२ में केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किये गए।  २०१४ में वह फिर सांसद चुने गए।  कैंसर से जूझ रहे विनोद खन्ना की तस्वीरें देख कर उनके प्रशंसक चौंक पड़े थे।  इतना खूबसूरत व्यक्ति इस दशा को पहुँच गया है ! फ़िरोज़ खान और विनोद खन्ना समकालीन एक्टर थे। दोनों बेहद अच्छे दोस्त थे।  दोनों को ही कैंसर था।  दोनों की ही मृत्यु २७ अप्रैल को हुई।  श्रद्धांजलि विनोद खन्ना।

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