लोकप्रिय संगीतकार लक्ष्मीकान्त - प्यारेलाल के संगीत के बारे में कुछ भी कहना सूरज को दिया दिखाने जैसा ही है. लेकिन हम यहाँ बात कर रहे हैं संगीतकार प्यारेलाल के बारे में जो की करीब एक दशक बाद एक बार फिर से अपने चाहने वालों का मनोरंजन करने के लिए आ रहे हैं एलबम ‘आवाज़ दिल से’ के द्वारा. इटरनल ड्रीम्सद्वारा रिलीज़ किये गए इस एलबम में गीतों को गाया है गायक पंकज चतुर्वेदीने. पिछले दिनों प्यारेलाल जी से बात हुई उनके इस नए एलबम के गीत संगीत के बारे में. प्रस्तुत हैं कुछ मुख्य अंश ----
14 साल के बाद एक बार फिर श्रोता आपका संगीत सुनेगें, लेकिन क्या वजह रही इतने साल तक जो आप अपने चाहने वालों से दूर रहें?
नही - नही हम अपने चाहने वालों से दूर नही हुए कभी भी. बस थोडा सा ब्रेक लिया था. सन ६३ से सन ९८ तक लगातार हमने काम किया. इसी बीच हमने लोक संगीत, भारतीय व पाश्चात्य संगीत का अध्यनन किया व विदेशों में भी परफोर्म किया. हाँ बहुत अच्छा लग रहा है कि अपने इस एलबम ‘आवाज़ दिल से’ के माध्यम से हम एक बार अपने चाहने वालों के रूबरू होंगें.
एलबम के बारे में बताइए ? यह आपका पहला एलबम है तो कैसा रहा अनुभव इसमें काम करते वक्त, एलबम का नाम 'आवाज़ दिल से’ रखने की कोई ख़ास वजह ?
इटरनल ड्रीम्स म्यूजिक कंपनी द्वारा रिलीज़ किये गए इस एलबम में नए गायक पंकज चतुर्वेदी ने गीतों को गाया है.कुल ६ गीत हैं इसमें, एक ‘माँ’ का गीत है, एक रोमांटिक गीत है और कुछ रीमिक्स गीत भी हैं.
‘आवाज़ दिल से’ रखने की वजह यह ही है कि जब भी हम दिल से गाते हैं तो सीधे सुनने वालों के दिलों पर दस्तक देता है गीत. गायक पंकज ने भी सारे गीतों को अपने दिल से गाया है.
अनुभव यह हुए की एलबम में काम करते वक्त पूरी आज़ादी के साथ काम किया किसी भी तरह का कोई बंधन नही था कोई भी सिचुएशन नही थी, जबकि फिल्म में तो कहानी की मांग के हिसाब से काम करना होता है।
पकंज के साथ ही एलबम की कोई ख़ास वजह ?
उसकी आवाज़ सीधे दिल को छूती है बहुत ही अलग आवाज़ है ना तो उसकी आवाज़ किशोर जैसी है न रफ़ी जैसी न वो मन्ना डे है ना सोनू निगम और न शान। उसने उम्मीद से ज्यादा गाया है बहुत मेहनत की है यह मैं इसलिए नही कह रहा है कि मैंने उसके साथ एलबम किया है।जब आप सुनेगें गीतों को तब आप जरुर मेरी बात पर यकीन करेगें।
किस तरह के गीत हैं इसमें और क्या जब श्रोता सुनेगें तो उन्हें लक्ष्मी - प्यारे के संगीत की झलक इसमें महसूस होगी ?
लक्ष्मी प्यारे के संगीत का जादू तो होगा लेकिन कुछ नयी खुशबू के साथ । मुझे पूरा यकीन है की श्रोताओ के दिलों पर जादू चलायेगा "दिल की आवाज़' एलबम और पंकज की आवाज़ का जादू भी छ जाएगा।
आपने एलबम में गीत "मैं शायर तो नही" भी शामिल किया है तो कोई ख़ास वजह इसी गीत को शामिल करने की कोई ख़ास वजह ?
इस गीत को हर उम्र के श्रोता पसंद करते हैं इसमें हरकत - मुरकी तो है ही साथ में थोडा सा आधुनिक भी बनाया है हमने इसे।
इसके अलावा एलबम की कोई खास वजह ?
हमने इसमें गीतों की रिकॉर्डिंग 100 संगीतकारों के साथ की है इसके अलावा कोरस का प्रयोग किया जबकि आम तौर पर ऐसा नही होता. लाइव रिकॉर्डिंग के साथ- साथ कीबोर्ड का भो प्रयोग किया है।

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