सूफी गायकी का जिक्र हो और लोकप्रिय गायक कैलाश खेर की बात न हो ऐसा तो संभव ही नही है, लेकिन इन्हीं गायक कैलाश खेर ने फिल्म "लव सेक्स और धोखा" में एक ऐसा गीत भी गाया है, जिसे सबके सामने गाने में थोड़ी झिझक महसूस हो? उनसे पूछने पर कि जबकि आपने एक से एक बढ़ कर शानदार गीत गायें हैं तो ऐसे में ऐसा गीत गाने की कोई ख़ास वजह?
मुस्कुराते हुए उन्होंने जवाब दिया कि, "मैं समझ रहा हूँ, की क्या जानने की कोशिश है आपकी? कोई ख़ास वजह नही रही जब मैंने ऐसा गीत गाया.
बस मुझे ऑफर हुआ यह मैंने इसे गाया और वैसे भी एक गायक होने के नाते हमे सभी तरह की गीत गाने होते हैं, कोई एक वर्ग नही बनाया मैंने कि यह नही गाऊंगा या वो नही गाऊंगा. फिर उन्होंने कहा की जब आप इस गीत के बारे में पूछ रहे हैं, तब मैं आपको बताना चाहता हूँ की मेरे इस गीत को भी श्रोताओं ने बहुत पसंद किया और आज भी जब कहीं मैं शो करने जाता हूं श्रोता इस गाने की फरमाइश करते हैं."
तो क्या आप उनकी इस फरमाइश को पूरा करते हैं? के जवाब में वो कहते हैं, "नहीं मैं कोशिश करता हूँ उनका ध्यान दूसरे गीत की तरफ करने की, लेकिन फिर भी कई बार कालेज में होने वाले शो के दौरान श्रोताओं की फरमाइश पर यह गीत गाना ही पड़ता है."
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