यह वाक़या साठ के दशक का है। किदार शर्मा ने अपने बेटे अशोक शर्मा को नायक बनाने के लिए एक फिल्म का निर्माण कर रहे थे। इस फिल्म के डायरेक्टर खुद किदार शर्मा थे। हमारी याद आएगी टाइटल वाली इस फिल्म में अशोक शर्मा की नायिका तनूजा थी। इस दुखांत फिल्म में हिट गीतों की भरमार थी। किदार शर्मा ने फिल्म के लिए दो गीत आँखों में तेरी याद लिए जा रहा हूँ मैं और फरिश्तों की नगरी में आ गया हूँ मैं मुकेश से रिकॉर्ड करवा लिए थे। दो डुएट मुकेश और लता मंगेशकर की आवाज़ में सोचता हूँ ये क्या किया मैंने और जवां मोहब्बत भी रिकॉर्ड कर लिए गए थे। पांचवा गीत कभी तन्हाइयों में हमारी याद आयेगी लता मंगेशकर की आवाज़ में रिकॉर्ड करवाना था। लेकिन, इस दौरान लता मग़ेश्कर काफी बिजी हो गई। उन्होंने संगीतकार से इस गीत को बहन आशा भोंसले से गवाने का सुझाव दिया। लेकिन, किदार शर्मा ने मुबारक बेगम को इस गीत की गायिका बना दिया। इसके साथ ही कभी तन्हाइयों में हमारी याद आयेगी गीत आल टाइम क्लासिक बन गया। इस गीत के संगीतकार स्नेहल भाटकर थे। वासुदेव भाटकर एचएमवी के लिए काम करते थे। वह छद्म नामों से अन्य बैनरों के लिए काम किया करते थे। इसके लिए वह अपनी बेटी के नाम का उपयोग भी करते थे। उनकी बेटी का नाम स्नेहल था। कई फिल्मों में संगीतकारों के बी वासुदेव और स्नेहल सुनाने को मिलते हैं। यह सभी नाम वासुदेव भाटकर या कहिये हमारी याद आएगी के संगीतकार स्नेहल भाटकर के ही नाम थे। स्नेहल भाटकर ने हम पर जादू दाल गए, राधा के मन की मुरलिया पुकारे, दिल का मिलना मुश्किल है, वह चली ग़म की हवा, लहरों पे लहर, आदि जैसी गीतों की रचना की थी। किदार शर्मा की फिल्म नील कमल से ही स्नेहल भाटकर के करियर की शुरुआत हुई थी। उनका निधन २९ मई २००७ को हुआ था। आज (१७ जुलाई १९१९) को उनका जन्म हुआ था।
रविवार, 17 जुलाई 2016
क्लासिक हमारी याद आएगी के संगीतकार स्नेहल भाटकर
यह वाक़या साठ के दशक का है। किदार शर्मा ने अपने बेटे अशोक शर्मा को नायक बनाने के लिए एक फिल्म का निर्माण कर रहे थे। इस फिल्म के डायरेक्टर खुद किदार शर्मा थे। हमारी याद आएगी टाइटल वाली इस फिल्म में अशोक शर्मा की नायिका तनूजा थी। इस दुखांत फिल्म में हिट गीतों की भरमार थी। किदार शर्मा ने फिल्म के लिए दो गीत आँखों में तेरी याद लिए जा रहा हूँ मैं और फरिश्तों की नगरी में आ गया हूँ मैं मुकेश से रिकॉर्ड करवा लिए थे। दो डुएट मुकेश और लता मंगेशकर की आवाज़ में सोचता हूँ ये क्या किया मैंने और जवां मोहब्बत भी रिकॉर्ड कर लिए गए थे। पांचवा गीत कभी तन्हाइयों में हमारी याद आयेगी लता मंगेशकर की आवाज़ में रिकॉर्ड करवाना था। लेकिन, इस दौरान लता मग़ेश्कर काफी बिजी हो गई। उन्होंने संगीतकार से इस गीत को बहन आशा भोंसले से गवाने का सुझाव दिया। लेकिन, किदार शर्मा ने मुबारक बेगम को इस गीत की गायिका बना दिया। इसके साथ ही कभी तन्हाइयों में हमारी याद आयेगी गीत आल टाइम क्लासिक बन गया। इस गीत के संगीतकार स्नेहल भाटकर थे। वासुदेव भाटकर एचएमवी के लिए काम करते थे। वह छद्म नामों से अन्य बैनरों के लिए काम किया करते थे। इसके लिए वह अपनी बेटी के नाम का उपयोग भी करते थे। उनकी बेटी का नाम स्नेहल था। कई फिल्मों में संगीतकारों के बी वासुदेव और स्नेहल सुनाने को मिलते हैं। यह सभी नाम वासुदेव भाटकर या कहिये हमारी याद आएगी के संगीतकार स्नेहल भाटकर के ही नाम थे। स्नेहल भाटकर ने हम पर जादू दाल गए, राधा के मन की मुरलिया पुकारे, दिल का मिलना मुश्किल है, वह चली ग़म की हवा, लहरों पे लहर, आदि जैसी गीतों की रचना की थी। किदार शर्मा की फिल्म नील कमल से ही स्नेहल भाटकर के करियर की शुरुआत हुई थी। उनका निधन २९ मई २००७ को हुआ था। आज (१७ जुलाई १९१९) को उनका जन्म हुआ था।
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